उमरिया जिला: कोयला, जंगलों और बाघों की धरती

उमरिया (मध्य प्रदेश) – मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में बसा उमरिया जिला प्रकृति की प्राचुर्यता और ऐतिहासिक धरोहर का अनुपम संगम है। घने जंगलों, समृद्ध खनिज संसाधनों और बांधवगढ़ जैसे विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान के लिए जाना जाने वाला यह जिला पर्यटन और औद्योगिक संभावनाओं से भरपूर है।

उमरिया जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 4548 वर्ग किलोमीटर है। यह शहडोल संभाग का हिस्सा है और उत्तर में सतना, दक्षिण में डिंडोरी, पूर्व में शहडोल तथा पश्चिम में कटनी जिले से घिरा हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी करीब 6.45 लाख है। जिले में आदिवासी बहुल आबादी है, जिसमें गोंड, बैगा और कोल प्रमुख जनजातियां शामिल हैं।

समृद्ध प्राकृतिक संसाधन

उमरिया जिला कोयला भंडारों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा संचालित कई कोयला खदानें संचालित हो रही हैं, जिनमें नौरोजाबाद क्षेत्र प्रमुख है। कोयला उत्पादन यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। इसके अलावा जिले में वन संपदा भी प्रचुर है, जहां से इमारती लकड़ी, ईंधन और बिड़ी पत्ता प्राप्त होता है।

कृषि क्षेत्र में धान, मक्का, गेहूं, चना और अरहर मुख्य फसलें हैं। हालांकि 2006 में केंद्र सरकार ने उमरिया को देश के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल किया था, जिसके बाद यहां बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड (BRGF) के तहत विकास कार्य तेज किए गए।

वन्यजीवों का गौरव: बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

जिले की सबसे बड़ी पहचान बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान है। मात्र 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह उद्यान देश के उन चुनिंदा पार्कों में शामिल है जहां बाघों की घनत्व सबसे अधिक है। सफेद बाघ ‘मोहन’ की ऐतिहासिक कहानी भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है, जिसे 1951 में रीवा महाराजा मार्तंड सिंह ने पकड़ा था।

ऐतिहासिक विरासत

उमरिया का इतिहास काफी रोचक है। 1998 में यह शहडोल जिले से अलग होकर स्वतंत्र जिला बना। पहले यहां लोधी राजपूतों का शासन था। उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर और हाथी दरवाजा जैसी ऐतिहासिक इमारतें बनवाईं। बाद में बघेल वंश के राजाओं ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। उमरिया को 17वीं शताब्दी में रीवा रियासत की दक्षिणी राजधानी भी बनाया गया था।

बांधवगढ़ का किला जिले का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। 2430 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला प्राचीन काल में माघ वंश की राजधानी रहा।

अन्य महत्वपूर्ण

मानपुर: उमरिया जिले की सबसे बड़ी तहसील और बांधवगढ़ का द्वार

  नौरोजाबाद: कोयला उद्योग का केंद्र।

  चंदिया: कालिका मंदिर और पुराना शिव मंदिर।

  पाली-बिरसिंहपुर: बिरसिनीदेवी मंदिर और सालाना मेले।

  मंथार बांध (बिरसिंहपुर जलाशय): संजय गांधी थर्मल पावर स्टेशन के लिए बनाया गया यह जलाशय पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो रहा है।

  उमरिया शहर: जिले का मुख्यालय, जहां सगरा मंदिर और मड़ी बाग मंदिर जैसी प्राचीन धरोहरें हैं।

उमरिया वर्तमान में सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कटनी-बिलासपुर रेलखंड का रेलवे स्टेशन यहां सुविधा प्रदान करता है।

मध्य प्रदेश सरकार जिले को पर्यटन और औद्योगिक रूप से और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। बांधवगढ़ के बाघों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यहां देश-विदेश से पर्यटक आकर्षित होते रहते हैं।

उमरिया – जहां इतिहास, प्रकृति और विकास की कहानी साथ-साथ चल रही है।


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