
कछौहा पंचायत में भ्रष्टाचार की ‘पुलिया’: बिना नदी और बहाव के बहाए जा रहे लाखों रुपये
मानपुर (उमरिया) | 15 मई 2026
जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कछौहा में विकास के नाम पर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट हो रही है। यहाँ भ्रष्टाचार का एक ऐसा नमूना पेश किया गया है जिसे देखकर प्रशासन की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरपंच, सचिव और तकनीकी अमले की मिलीभगत से एक ऐसी पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी उपयोगिता शून्य के बराबर है।
न नदी, न नाला, फिर भी 14 लाख की पुलिया
ताजा मामला दुलहरा बांसा रोड पर स्थित उमरहा नाले का है। यहाँ 14 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से एक पुलिया बनाई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह यह निर्माण हो रहा है, वहाँ बरसात में भी पानी का नामोनिशान नहीं रहता। आरोप है कि यह पुलिया जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ‘जेब भरने’ के लिए बनाई जा रही है।
राजस्व और वन विभाग के बीच ‘जादुई’ खेल
इस निर्माण कार्य के पीछे जमीन को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक:
• जो जमीन पहले फॉरेस्ट (जंगल) के बॉर्डर में आती थी, उसे रसूख के दम पर रातों-रात राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया गया।
• अब फॉरेस्ट विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है, जबकि राजस्व विभाग के खाते में यह दर्ज हो चुकी है।
• इस खेल में पटवारी से लेकर जनपद के आला अधिकारियों की मौन सहमति की आशंका जताई जा रही है।
गुणवत्ता से समझौता: बिना रॉयल्टी की सामग्री का उपयोग
भ्रष्टाचार यहीं नहीं रुकता। निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद घटिया बताई जा रही है:
• इंजीनियर नदारद: उपयंत्री (सब-इंजीनियर) ऑफिस से ही ‘रिमोट कंट्रोल’ के जरिए काम चला रहे हैं, मौके पर कोई तकनीकी अधिकारी मौजूद नहीं रहता।
• अवैध सामग्री: निर्माण में उपयोग हो रही रेत और गिट्टी कहाँ से आ रही है, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। बिना रॉयल्टी चुकाए अवैध उत्खनन की सामग्री का उपयोग कर शासन को दोहरा चूना लगाया जा रहा है।
• दरारें: स्थिति यह है कि पुलिया पूरी तरह बनने से पहले ही उसमें दरारें दिखने की आशंका होने लगी है।
जिम्मेदारों की चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, ताकि जनता को लागत और कार्य की जानकारी न मिल सके। जब इस संबंध में जनपद एसडीओ शैलेंद्र सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।
क्षेत्र की जनता की मांग: नवागत कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय और जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ओहरिया से ग्रामीणों को उम्मीद है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे। यदि पिछले 2 वर्षों के कार्यों की जांच हुई, तो जनपद से लेकर जिला पंचायत तक के कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।










