
दहेज की भेंट चढ़ी खुशियां: गाड़ी और सोने की अंगूठी के लिए दूल्हे ने तोड़ी शादी, दुल्हन करती रही इंतज़ार
मानपुर (उमरिया)। समाज में आज भी दहेज रूपी कुप्रथा की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक झकझोर देने वाला मामला मानपुर क्षेत्र के ग्राम कोलर से सामने आया है। यहाँ एक दूल्हे ने सिर्फ इसलिए बारात लाने से मना कर दिया क्योंकि उसे दहेज में मनचाही ‘अपाचे’ बाइक और सोने की अंगूठी नहीं मिली।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता कल्पना यादव ने उमरिया पुलिस अधीक्षक को सौंपे आवेदन में अपनी आपबीती सुनाई है। कल्पना के अनुसार, उसकी बड़ी बहन की शादी रक्षा निवासी उदयभान से हुई थी। कुछ वर्ष पूर्व बहन के निधन के बाद, कल्पना ही उसके दोनों बच्चों की देखभाल कर रही थी। इसी बीच जीजा उदयभान ने बच्चों और कल्पना के भविष्य का वास्ता देकर उससे शादी का प्रस्ताव रखा।
दोनों ज्वालामुखीय मंदिर में शादी कर पति-पत्नी की तरह रहने लगे थे। जब कल्पना के परिजनों को यह पता चला, तो उन्होंने सामाजिक और हिंदू रीति-रिवाज से दोबारा शादी करने का निर्णय लिया।
ऐन वक्त पर बदला दूल्हा
शादी की तारीख 12 मई 2026 तय हुई थी। घर में खुशियों का माहौल था, मेहमान आ चुके थे और हल्दी-तेल की रस्में भी पूरी हो चुकी थीं। लेकिन 11 मई को उदयभान कल्पना के घर पहुँचा और दहेज के सामान का मुआयना करने लगा।
पीड़िता का आरोप है कि वहाँ ‘अपाचे’ गाड़ी और सोने की अंगूठी न पाकर वह भड़क गया। परिजनों द्वारा असमर्थता जताने और भविष्य में व्यवस्था करने की बात कहने पर भी वह नहीं माना और धमकी दी कि मांग पूरी न होने पर वह बारात नहीं लाएगा।
दुल्हन के साथ मारपीट और शोषण का आरोप
12 तारीख को जब बारात नहीं आई, तो पीड़िता ने उदयभान से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसका फोन बंद मिला। अगले दिन जब वह ससुराल पहुँची, तो वहां मौजूद परिजनों ने उसके साथ गाली-गलौज और जमकर मारपीट की, जिससे वह बेहोश हो गई। पीड़िता का गंभीर आरोप है कि उदयभान शादी का झांसा देकर पिछले 4 वर्षों से उसके साथ शारीरिक संबंध बना रहा था।
“मेरे माता-पिता ने कहा कि अभी व्यवस्था नहीं है, बाद में कर देंगे, लेकिन वह नहीं माना और मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।” — पीड़िता (शिकायत पत्र के अनुसार)
पुलिस से न्याय की गुहार
पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। उसने आरोपी उदयभान और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बेटियों की खुशियाँ आज भी चंद सामान और पैसों की मोहताज रहेंगी?










