मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था: महिला डॉक्टर का अभाव, प्रसूति सेवाएं प्रभावित

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना और 108-102 एम्बुलेंस जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत है। उमरिया जिले के मानपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

दो डॉक्टरों के भरोसे पूरा क्षेत्र

मिली जानकारी के

मुख्य समस्याएं और ग्रामीणों का आक्रोश:

• प्रसूति सेवाओं का संकट: महिला डॉक्टर न होने से गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पा रहा है। जटिल मामलों में मरीजों को तत्काल उमरिया या शहडोल रेफर कर दिया जाता है।

• बंद पड़े आरोग्य केंद्र: इंदवार और बिजौरी जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी नियमित डॉक्टरों की मांग लंबे समय से लंबित है, जिससे ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे रहने को मजबूर हैं।

• आपातकालीन सेवाओं में देरी: सड़क दुर्घटनाओं या अन्य इमरजेंसी में मरीजों को केवल प्राथमिक मरहम-पट्टी के बाद रेफर कर दिया जाता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने से स्थिति बिगड़ जाती है।

महिला अधिकारियों से बड़ी उम्मीदें

क्षेत्रवासियों ने बताया कि वर्तमान में जिले और तहसील की प्रशासनिक कमान महिला अधिकारियों के हाथों में है। ऐसे में क्षेत्रीय महिलाओं को नवागत कलेक्टर महोदया, स्थानीय विधायक, सीएमएचओ (CMHO) और एसडीएम (SDM) से विशेष अपेक्षा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:

1. महिला डॉक्टर की तत्काल पदस्थापना की जाए।

2. रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।

3. आरोग्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर उनकी कार्यप्रणाली सुधारी जाए।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।

अनुसार, मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्तमान में केवल 2 डॉक्टर पदस्थ हैं। इससे भी बदतर स्थिति अमरपुर केंद्र की है, जो महज 1 डॉक्टर के सहारे चल रहा है। स्टाफ की इस भारी कमी के कारण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की यह संख्या क्षेत्र की बढ़ती जनसंख्या और जरूरतों के हिसाब से ऊंट के मुँह में जीरे के समान है।

“महिला डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में परिजनों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।”

— स्थानीय निवासी

मुख्य समस्याएं और ग्रामीणों का आक्रोश:

• प्रसूति सेवाओं का संकट: महिला डॉक्टर न होने से गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पा रहा है। जटिल मामलों में मरीजों को तत्काल उमरिया या शहडोल रेफर कर दिया जाता है।

• बंद पड़े आरोग्य केंद्र: इंदवार और बिजौरी जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी नियमित डॉक्टरों की मांग लंबे समय से लंबित है, जिससे ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे रहने को मजबूर हैं।

• आपातकालीन सेवाओं में देरी: सड़क दुर्घटनाओं या अन्य इमरजेंसी में मरीजों को केवल प्राथमिक मरहम-पट्टी के बाद रेफर कर दिया जाता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने से स्थिति बिगड़ जाती है।

महिला अधिकारियों से बड़ी उम्मीदें

क्षेत्रवासियों ने बताया कि वर्तमान में जिले और तहसील की प्रशासनिक कमान महिला अधिकारियों के हाथों में है। ऐसे में क्षेत्रीय महिलाओं को नवागत कलेक्टर महोदया, स्थानीय विधायक, सीएमएचओ (CMHO) और एसडीएम (SDM) से विशेष अपेक्षा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:

1. महिला डॉक्टर की तत्काल पदस्थापना की जाए।

2. रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।

3. आरोग्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर उनकी कार्यप्रणाली सुधारी जाए।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।


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