
उमरिया जिले का इतिहास
परिचय
उमरिया जिला मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। यह शहडोल संभाग का हिस्सा है। जिले का मुख्यालय उमरिया शहर है। इसका क्षेत्रफल लगभग 4,548 वर्ग किलोमीटर है। जिले की सबसे प्रसिद्ध जगह बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान (टाइगर रिजर्व) है, जो विश्व प्रसिद्ध है।
प्राचीन इतिहास
- उमरिया क्षेत्र प्राचीन काल से घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता था।
- बांधवगढ़ प्राचीन काल में माघ वंश (Magha dynasty) की राजधानी था।
- बांधवगढ़ किला बहुत प्राचीन है। लोक मान्यता के अनुसार इसे भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण को उपहार में दिया था, इसलिए इसका नाम बांधवगढ़ (भाई का किला) पड़ा।
- इस क्षेत्र में कालचुरी काल (9वीं-11वीं शताब्दी) के कई मंदिर और अवशेष मिले हैं।
मध्यकालीन इतिहास
- उमरिया पर लोधी राजपूतों (मालगुजार) का शासन था।
- लोधी राजपूत परिवार ने नर्मदा नदी के किनारे लक्ष्मी नारायण मंदिर बनवाया और हाथी दरवाजा का निर्माण किया।
- बाद में बघेल वंश के राजाओं (रीवा रियासत) ने लोधियों को हराकर इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
- रीवा के बघेल राजाओं के लिए उमरिया दक्षिणी राजधानी के रूप में विकसित हुआ। घने जंगल और बाघों के कारण यह राजकुमारों का पसंदीदा शिकारगाह रहा।
- बांधवगढ़ किला रीवा महाराजाओं का प्रमुख आखेट स्थल था। मुगल बादशाह अकबर के बचपन का कुछ समय यहां बीता था।
आधुनिक इतिहास
- ब्रिटिश काल में यह क्षेत्र रीवा रियासत का हिस्सा था।
- स्वतंत्रता के बाद यह दक्षिण रीवा जिले का मुख्यालय था।
- बाद में बांधवगढ़ तहसील का मुख्यालय बना।
- 31 मई 1998 को शहडोल जिले से अलग करके उमरिया जिले का गठन किया गया। (कुछ स्रोत 6 जुलाई 1998 की तारीख भी बताते हैं)।
मुख्य ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल
- बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान — बाघों के लिए विश्व प्रसिद्ध।
- बांधवगढ़ किला।
- लक्ष्मी नारायण मंदिर।
- नौरोजाबाद क्षेत्र के कोयला खदान।
- संजय गांधी थर्मल पावर स्टेशन (पाली)।
उमरिया का इतिहास वन, वन्यजीव, राजसी गौरव और प्राचीन सभ्यताओं का अद्भुत मिश्रण है। आज यह जिला प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन और खनिज संसाधनों (कोयला) के लिए जाना जाता है।










