
ग्रीष्मकालीन खेल शिविर “आरोह” का आगाज, लेकिन नगर परिषद की ‘सुस्ती’ ने बिगाड़ा खेल का मजा

मानपुर/उमरिया
12 मई, 2026
मानपुर (उमरिया): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और खेल मंत्री विश्वास सारंग की मंशानुरूप उमरिया जिले के मानपुर मुख्यालय में प्रतिभाओं को निखारने के लिए “आरोह-2026” ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत तो बड़े उत्साह के साथ हुई है, लेकिन स्थानीय नगर परिषद की उदासीनता ने इस आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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मैदान पर पसीना बहा रहे खिलाड़ी, विभाग जुटा उत्साह बढ़ाने में
मानपुर के ग्रामीण खेल मैदान में प्रतिदिन सुबह 6:00 से 7:30 और शाम 5:30 से 7:00 बजे तक खिलाड़ियों का जमघट लग रहा है। यहाँ कोच और विशेषज्ञों द्वारा वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, क्रिकेट और फुटबॉल का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
“इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल खेल सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास, फिटनेस और अनुशासन के जरिए उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना है।”
— भगवत प्रसाद पटेल, विकासखंड समन्वयक
खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए मानपुर थाना प्रभारी मुकेश मर्शकोले द्वारा प्रतिदिन अंकुरित चने और फलों का वितरण किया जा रहा है, जिसकी क्षेत्र में सराहना हो रही है।
कागजों में सिमटे निर्देश: नगर परिषद की बड़ी लापरवाही
एक ओर जहाँ खेल विभाग और पुलिस प्रशासन बच्चों के भविष्य के लिए पसीना बहा रहा है, वहीं नगर परिषद मानपुर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ती नजर आ रही है।
क्या थे निर्देश?
जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी द्वारा जारी पत्र (क्रमांक/586, दिनांक 24/04/2026) के तहत मुख्य नगरपालिका अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:
• खेल परिसर की प्रतिदिन साफ-सफाई की जाए।
• धूल से बचाव के लिए मैदान में पानी का छिड़काव हो।
• खिलाड़ियों के लिए शुद्ध पेयजल और ठंडे पानी हेतु मटकों की व्यवस्था हो।
• चूना और ब्लीचिंग का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।
जमीनी हकीकत:
विभागीय आदेश के बावजूद धरातल पर ये सुविधाएं नदारद हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में बच्चों के लिए पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध न कराना नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
बड़ा सवाल: क्या केवल कागजों पर चलेगा प्रशासन?
जब उच्च अधिकारियों द्वारा लिखित रूप में व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के आदेश दिए जा चुके थे, तब भी स्थानीय अमले की यह ‘खामोशी’ स्पष्ट रूप से लापरवाही को दर्शाती है।
• क्या स्थानीय प्रशासन खेल प्रतिभाओं के प्रति गंभीर नहीं है?
• भीषण गर्मी में बिना पानी और सफाई के बच्चे कैसे करेंगे अभ्यास?
• क्या इस लापरवाही के लिए किसी की जवाबदेही तय होगी?
खेल प्रतिभाओं को तराशने के इस पुनीत कार्य में नगर परिषद की यह उदासीनता न केवल व्यवस्था को ठेंगा दिखा रही है, बल्कि प्रशिक्षण ले रहे नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना यह है कि खबरें सुर्खियां बनने के बाद जिम्मेदार जागते हैं या व्यवस्थाएं यूँ ही राम भरोसे रहेंगी।










