बांधवगढ़ में डेढ़ वर्षीय तेंदुआ शावक का शव बरामद, वन महकमे में मची खलबली

उमरिया: उमरिया जनपद के सुप्रसिद्ध बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से वन्यजीवों के संरक्षण पर सवाल खड़े करने वाली एक दुखद खबर प्रकाश में आई है। रिज़र्व के मझौली परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कक्ष संख्या आर.एफ. 404 में रूटीन सर्चिंग के दौरान गश्ती दल को एक नर तेंदुआ शावक मृत हालत में मिला। घने जंगलों के बीच बांस की झाड़ियों से उठ रही तीखी सड़न की बू का पीछा करते हुए जब सुरक्षाकर्मी वहां पहुंचे, तो इस संवेदनशील घटना का पर्दाफाश हुआ।

नियमों के तहत शुरू हुई तफ्तीश

जैसे ही इस अनहोनी की सूचना आला अधिकारियों तक पहुंची, पूरे महकमे में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। फौरन ही समूचे परिसर को सील कर दिया गया। मामले की नजाकत को देखते हुए ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के तय नियमों व प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अग्रिम कार्रवाई आरंभ की गई।

डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर से छानबीन

घटनास्थल के आसपास किसी भी तरह की साजिश की आशंका को भांपते हुए विशेष खोजी कुत्तों (डॉग स्क्वॉड) की मदद ली गई। खोजी दल ने सघन वन क्षेत्र में घंटों तक सुराग ढूंढने की कोशिश की। इसके अतिरिक्त, शिकारियों द्वारा बिछाए जाने वाले फंदे, जाल या बारूद का पता लगाने के लिए मेटल डिटेक्टर से पूरे इलाके की बारीकी से स्कैनिंग की गई। हालांकि, प्रारंभिक छानबीन में वहां से कोई भी आपत्तिजनक या संदेहास्पद वस्तु हाथ नहीं लगी है।

अंग सुरक्षित, पर फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

पशु चिकित्सकों के मुताबिक, मृत वन्यजीव नर प्रजाति का था और उसकी आयु तकरीबन 18 महीने आंकी जा रही है। मौत की असली वजह जानने के लिए वन्यप्राणी स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राजेश तोमर और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विपिन चंद्र आदर्श की देखरेख में शव का विच्छेदन (पोस्टमार्टम) किया गया। डॉक्टरों की टीम ने विसरा और अन्य जरूरी अंगों के सैंपल लेकर उन्हें लेबोरेटरी जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है।

राहत की बात यह है कि पहली नजर में शावक के नाखून, खाल और दांत समेत सभी अंग पूरी तरह सलामत मिले हैं। इस वजह से अवैध शिकार (Poaching) की आशंका न के बराबर है। इसके बावजूद, वन विभाग इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा है और वन्यप्राणी अपराध के तहत केस दर्ज कर हर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रहा है।

प्रोटोकॉल के साथ हुआ अंतिम संस्कार

पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, तय सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार शावक के पार्थिव शरीर को अग्नि के हवाले कर दिया गया। इस दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की बकायदा वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई।

अंतिम संस्कार के समय मौके पर मौजूद मुख्य लोग:

• डॉ. अनुपम सहाय (क्षेत्र संचालक)

• अंजू वर्मा (रेंज ऑफिसर)

• सन्नत कुमार सिंह (तहसीलदार, मानपुर)

• अक्षय दलवी (NTCA के प्रतिनिधि)

• मूलचंद्र जायसवाल (पनपथा ग्राम पंचायत के सरपंच)

आखिर कैसे हुई मौत?

बांधवगढ़ के जंगलों में हुई इस रहस्यमयी मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि शावक की जान किसी आपसी हिंसक भिड़ंत (Infraspecific fight), गंभीर बीमारी या फिर किसी जहरीले पदार्थ के सेवन से गई होगी। बहरहाल, मौत के असली कारणों से पर्दा अब फोरेंसिक लैब से आने वाली अंतिम रिपोर्ट के बाद ही उठ सकेगा।


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