भानु सप्तमी 2026: ज्येष्ठ अधिकमास में बन रहा है रविवार और सप्तमी का दुर्लभ संयोग, जानें सही तिथि, महत्व और पूजा विधि

JSNN (Jitendra Sai News Network) धर्म-अध्यात्म तारीख: 05 जून, 2026 स्थान: उज्जैन

भानु सप्तमी 2026: ज्येष्ठ अधिकमास में बन रहा है रविवार और सप्तमी का दुर्लभ संयोग, जानें सही तिथि, महत्व और पूजा विधि

उज्जैन: हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष जून के महीने में एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जिसे ‘भानु सप्तमी’ के रूप में मनाया जाएगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, जब भी सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है। यह दिन पूरी तरह से सूर्यदेव की आराधना को समर्पित होता है।

आइए जानते हैं कि साल 2026 में भानु सप्तमी कब है, इसका क्या महत्व है और इस दिन सूर्यदेव को प्रसन्न करने की सही पूजा विधि क्या है।

भानु सप्तमी 2026 की सही तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ अधिकमास की पावन सप्तमी तिथि 7 जून 2026, दिन रविवार को पड़ रही है। रविवार और सप्तमी का यह अद्भुत संयोग भानु सप्तमी के पर्व को और भी अधिक फलदायी और पवित्र बना रहा है।

भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन ही भगवान सूर्यदेव अपने दिव्य रथ पर प्रकट हुए थे। सूर्यदेव को ऊर्जा, अच्छी सेहत, आत्मा, नेतृत्व और सफलता का कारक माना जाता है।

  • महादान के बराबर फल: शास्त्रों में उल्लेख है कि भानु सप्तमी के दिन की गई सूर्य पूजा, व्रत और दान-पुण्य का फल सूर्यग्रहण के समय किए गए दान के समान पुण्यकारी होता है।
  • बाधाओं से मुक्ति: इस दिन नियमपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान मिलता है। साथ ही पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में आ रही सभी बाधाएं और दोष दूर होते हैं।

सूर्यदेव को प्रसन्न करने की सरल पूजा विधि

भानु सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय के समय पूजा करने का विधान है। श्रद्धालु इस दिन नीचे दिए गए नियमों के अनुसार पूजा कर सकते हैं:

  • सूर्य अर्घ्य: सुबह स्नान करने के बाद एक तांबे के लोटे (पात्र) में शुद्ध जल भरें। इस जल में लाल फूल और लाल चंदन मिलाएं। इसके बाद उगते हुए सूर्य नारायण को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: अर्घ्य देते समय और उसके बाद सूर्यदेव के प्रभावी मंत्र ‘ॐ सूर्याय नमः’ का जाप करें। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • दान-पुण्य: पूजा के बाद अपनी इच्छा और शक्ति के अनुसार गरीबों या जरूरतमंदों को अनाज, लाल कपड़े या तांबे के बर्तनों का दान करें।

रविवार के इस पावन संयोग पर सूर्यदेव की आराधना करने से आरोग्य (अच्छी सेहत) और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

JSNN अध्यात्म डेस्क


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