
✨ खुशियों की दास्तां: चंदिया की बेटी यशु तिवारी ने एमपीपीएससी में लहराया परचम!
⛏️ 24 वर्ष की उम्र में बनीं खनिज निरीक्षक, पहली बार गृह नगर पहुँचने पर हुआ भव्य स्वागत
🌟 छोटे शहर की प्रतिभा का बड़ा कमाल | मेहनत और दृढ़ संकल्प से रचा इतिहास
चंदिया (उमरिया)। 22/07/2026
प्रतिभा, लगन और अटूट मेहनत के बल पर बड़ी सफलता हासिल कर चंदिया नगर की होनहार बेटी यशु तिवारी ने पूरे उमरिया जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यशु तिवारी का चयन खनिज निरीक्षक (Mineral Inspector) के पद पर हुआ है।
महज 24 वर्ष की अल्पायु में मिली इस शानदार उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरे जिले में खुशी की लहर है। चयन के पश्चात पहली बार अपने गृह नगर चंदिया पहुँचने पर नगरवासियों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ उनका आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया।
📚 सफलता का मंत्र: ‘5 से 6 घंटे की निरंतर पढ़ाई ही काफी है’
यशु तिवारी ने अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के अटूट सहयोग को दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और बेटियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा:
💬 यशु तिवारी की अपील: “यदि आपका लक्ष्य स्पष्ट है और आप पूरी निष्ठा के साथ प्रयास करते हैं, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। परीक्षा निकालने के लिए 12-14 घंटे नहीं, बल्कि 5 से 6 घंटे की तन्मयता और निरंतरता के साथ की गई पढ़ाई ही काफी है। युवाओं को बस आत्मविश्वास और धैर्य बनाए रखना चाहिए।”
👨👩👧 गौरवान्वित माता-पिता बोले: ‘बेटी ने पूरे नगर का मान बढ़ाया’
यशु के पिता सतीश कांत तिवारी और माता रंजना तिवारी ने अपनी बेटी की सफलता पर भावुक होकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि:
- यशु ने हमेशा कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
- यह सफलता केवल हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे चंदिया नगर की उपलब्धि है।
- हमारा प्रयास हमेशा यही रहा कि बेटी की शिक्षा में कोई कमी न आए और उसे आगे बढ़ने का हर अवसर मिले।
👏 क्षेत्र की बेटियों के लिए बनीं मिसाल
यशु तिवारी की इस उपलब्धि से चंदिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यशु की सफलता से क्षेत्र की अन्य बेटियों को आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने की नई प्रेरणा मिलेगी। यह साबित हो गया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो छोटे शहरों और कस्बों की प्रतिभाएं भी देश-प्रदेश में अपना परचम लहरा सकती हैं।










